DAP, NPK तथा यूरिया खाद का उपयोग कब और कैसे करे?

किसान खेत में DAP, यूरिया और NPK हर फसल में डालता है पर इस बात से अनजान होता है की उस से पौधे को फायदा क्या है। पौधे को अपने  विकास के लिए  कुछ पोषक तत्व चाहिए होते है जिनमे से कुछ ज्यादा मात्रा में तो कुछ कम मात्रा में जो वो मिट्टी से लेता है। कई बार मिट्टी में सारे पोषक तत्व पहले से ही मजूद हो ऐसा जरुरी नहीं है। किसान DAP, NPK और यूरिया फसल में डालते है जिससे की पौधे का विकास अच्छे से हो और उत्पादन ज्यादा मिले।अगर पोशाक तत्व सही मात्रा में पौधे को मिलेंगे तो फसल की उत्पादन और गुणवत्ता दोनों ही ज्यादा होगी जिससे किसान को मार्किट में रेट भी ज्यादा मिलेगा। यह बात किसानो को धयान में रखनी होगी की सब खाद सब फसलों के लिए उपयुक्त नहीं होती है।हर फसल की पोषक तत्वों की मात्रा अलग अलग चाहिए होती है। आइये जाने DAP, यूरिया और NPK का इस्तेमाल खेत में क्यों किया जाता है? और इस्तेमाल करने का उचित समय क्या है?

यूरिया

यूरिया का उपयोग खेत में नाइट्रोजन के लिए किया जाता है। अगर पौधे को नाइट्रोजन ना मिले तो उसका विकास रुक जाता है और उसकी पुरानी पत्तिया पिली पड़ने लगती है। यूरिया खाद सभी फसलों में उपयोग की जाती है क्योकि सभी फसलों को नाइट्रोजन की जरूरत होती है। अगर नाइट्रोजन पौधे को नहीं मिलेगी तो उसकी विर्धि भी नहीं होगी। यूरिया की ज्यादा मात्रा भी फसल के लिए नुक्सान कर सकती है,इसलिय इसका नियमित मात्रा में ही उपयोग करना चाहिए। जब फसल के लिये खेत की तैयारी की जाती है तो उस समय इस खाद का उपयोग किया जाता है। सिर्फ नाइट्रोजन होने के कारण इसके साथ एसएसपी का उपयोग किया जाता है।

DAP

DAP मतलब Di-ammonum phosphate, इसमें नाइट्रोजन और फोरफोरस होता है। DAP में 18% नाइट्रोजन होता है जिसमे 15.5 % अम्मोनियम नाइट्रेट होता है। फॉस्फोरस की मात्रा इसमें 46% होती है जिसमे 39.5% पानी में घुलसनशील होता है। DAP दाम बाकी खादों के मुकाबले अधिक होता है।यह घीया, श्क्र्गन्दी, गाजर, मूली, प्याज़, आलू आदि फसलों में प्रयोग किया जाता है। इसमें फॉस्फोरस होता है जो की जड़ को मजबूत और जड़ो के निर्माण के लिए जरुरी होता है। DAP का उपयोग बुवाई के समय किया जाता है साथ ही यह फूल वाले पोधो के लिये भी इसका उपयोग किया जाता। इसका इस्तेमाल मध्य और भारी जमीन पर किया जा सकता है जो पानी कम सोखती है।

NPK

NPK जैसा की नाम से ही ज्ञात होता है की इसमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम पोषक तत्व होते है। यह तीनो तत्व पौधे की विर्धि और फसल की उपज और गुणवत्ता में काफी भूमिका निभाते है। नाइट्रोजन उत्तम विर्धि के लिये उपयोग होता है, फॉस्फोरस पौधे की जड़ो को मजबूत और जड़ो के निर्मांण के लिये जरुरी होता है, बात करे पोटाश की तो वो फल और फूलो के वजन और चमक के लिये इस्तेमाल किया जाता है यह अलग-अलग अनुपात में मिलता है जैसे की NPK 19-19-19, 13-0-45, 0-52-34, 0-0-50, 12-32-26 आदि।  फसल के चरणो के हिसाब से NPK के अलग-अलग अनुपातों का उपयोग होता है।

NPK 12-32-16

  • NPK 12-32-16 का उपयोग खाद के रूप में बुवाई के समय किया जाता है
  • इसका उपयोग गेहू,धान,सोयाबीन, मूंग, अरहर, गन्ना, लहसुन, चना, मक्का, उरद और मूंगफली आदि फसलों में इसका इस्तेमाल किया जाता है।
  • इसका उपयोग हलकी जमीन पर किया जा सकता है
  • इसका स्प्रे नहीं करना चाहिए। इसका उपयोग DAP की जगह किया जा सकता है।

NPK 19-19-19

  • इसका नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम तीनो 19% मात्रा में होता है।
  • इसका इस्तेमाल फसल की बुआई के 15से 30 दिनों की अवस्था में किया जाता है।
  • यह पौधे के वानस्पतिक विकास में मदद करता है। यह जड़ो, तनो और शाखाओ को मजबूत करता है।
  • इसके स्प्रे करने से पोधो में अच्छा फुटाव होता है।

NPK 0-52-34

  • इसमें फॉस्फोरस 52% होता है और पोटाश 34% की मात्रा में होता है
  • NPK 0-52-34 का उपयोग 35-55 दिन की फसल में करना चाहिए। उस समय हमे नाइट्रोजन की आवश्कता ज्यादा नहीं होती है।
  • इसका उपयोग फूल आने और दाना भरने के समय करना चाहिए। इससे फसल में फूल ज्यादा बनते है और फूलो का तना भी मजबूत रहता है।

NPK 0-0-50 

  • NPK 0-0-50 उपयोग फसल की आखिरी अवस्था में किया जाता है।
  • यह उन फसलों में उपयोग होता है जिनमे दाना ज्यादा बनता है जैसे की धान, मक्का सोयाबीन, गेहू आदि।
  • NPK 0-0-50 का उपयोग बीजो का वजन बढ़ाने और चमक के लिये किया जाता है ताकि मार्किट में अच्छे दाम मिल सके।

इन अनुपातों के अलावा भी NPK मार्किट में मिलता है जो फसल की चरणों के हिसाब से खेत में डाला जाते है

खादों के बारे में आपको जानकरी मिल गए होगी, पर जब भी आप खेत में कोई फसल उगाये उस से पहले खेत की मिट्टी की जांच जरूर करा ले।  इससे आपको खेत में जो पोषक तत्वो की कमी है उसके बारे में तो पता चलेगा जिससे  की आप उत्पादन में हो रही कमी को रोक पाएगे। बिना जरूरत के उर्वरको पर हो रहे फालतू खर्च पर भी आपको राहत मिलेगी। मिट्टी जांच आप फ्री में भी करा सकते है सरकार दवारा साइल हेल्थ कार्ड योजना से।  रेगिस्ट्रशन के बारे में पूरी जानकरी के लिये यहां क्लिक करे । 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *