किसान बिल के विरोध को क्या शांत कर पाएगा केंद्र सरकार द्वारा रबी फसल पर बढ़ाया MSP रेट, आइये जाने किस पर बढ़ाये गए है रेट

नए एग्रीकल्चर बिल का ऐलान होते है कई किसान और राजनैतिक दल इसके विरोध में खड़े हो गए है, पंजाब और हरियाणा में तो किसान बड़ी शख्या में सड़क पर उत्तर कर विरोध दिखाने लगे, इसी बिच कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह ने 6 रबी फसलों के बढ़े MSP का भी ऐलान कर दिया। बिल के पास होने पर किसानो को डर था की इस से MSP की व्यवस्था खत्म ना हो जाये पर सरकार का यह कहना था की MSP पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा वो व्यवस्था जारी ही रहेगी। कृषि मंत्री ने बढ़े MSP के साथ यह भी कहाँ की सरकार किसानो की सहायता के लिये हर संभव प्रयास करेगी।

narender singh tomar

लोकसभा में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया की आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने रबी फसलों की MSP बढ़ाने पर मजूरी दे दी है। यह फैसला केंद्र ने 2022 तक किसानो की आय दोगनी करने के हित में लिया है।

रबी विपणन वर्ष 2021-22 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य

गेहू, चना, जौ, मसूर, सरसों और सनफ्लॉवर के MSP पर बढ़ोतरी हुई है

  • गेहू का MSP Rs1925 से बढ़ाकर अब Rs 1975 प्रति क्विण्टल कर दिया गया है।
  • जौ का MSP Rs 1525 से बढ़कर Rs 1600 प्रति क्विण्टल हो गया है।
  • चने का MSP Rs 4875 से बढ़कर Rs 5100 प्रति क्विण्टल हो गया है।
  • सरसो का MSP बढ़कर Rs 4650 रुपये प्रति क्विण्टल हो गया है।
  • मसूर की MSP Rs 4800 से बढ़कर Rs 5100 प्रति क्विण्टल हो गया है।
  • सनफ्लॉवर की MSP Rs 5215 से बढ़कर Rs 5327 प्रति क्विण्टल हो गया है।
new rabi msp rate
रबी विपणन वर्ष 2021-22 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य

MSP रेट का बढ़ना किसानो के लिए एक बड़ी खुशख़बरी से कम नहीं है, पर विपक्षी दलों का कहना है की किसान बिलो के बाद बड़े MSP का ऐलान करना एक सोची समझी चाल है ताकि किसानो की आवाज़ को दबाया जा सके और बिलो के खिलाफ हो रहे किसान विरोध को कम किया जा सके। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुआ कहा की 6 वर्षो में मोदी सरकार के नेतृत्व में MSP में लगातार वृद्धि ही हुई और जो लोग किसानो को भर्मित कर रहे है उन्हें अब यह सब रोक देना चाहिए।

ये भी पढ़ें – किसान बिल 2020 : लोकसभा से पास हुए बिल पर इतना हंगामा क्यों? क्या है सरकार का दावा और किसान क्यों सड़को पर उतरे इसके विरोध के लिए?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *