अब जड़ गांठ ( निमेटोड्स) की समस्या से हो रहे फसल उत्पादन और गुणवत्ता की गिरावट पर लगाये रोखथाम

अगर आपके पौधे का विकास नहीं हो रहा है और वो सुख रहा है तो उसके कई कारण हो सकते है।हमे सही कारण पता कर निंयत्रण  करना चाहिए इस से फ़ालतू खर्चा तो बचेगा ही साथ ही मिट्टी में कम से कम रसायन जाएगा। आपने कई बार देखा होगा की जब आप एक पौधा जमीन से निकालते है और तो उसकी जड़ो में  गांठे नजर आती है तो इसका मतलब है यह की ये निमेटोड्स (Nematodes) की समस्या है और अगर आपने इसकी रोकथाम नहीं करी तो यह फैलता  जायेगा  जिससे आपकी फसल के उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा। आइये जानते है यह होते क्या है और हम इसकी रोकथाम कैसे कर सकते है।

 निमेटोड्स (Nematodes)

 निमेटोड्स (Nematodes) बहुत छोटे परजीवी होते है जिन्हे नगन आँखों से नहीं देखा जा सकता है। यही ज्यादातर नर्सरी और जल निकासी वाली भूमि में पाए जाते है। 

लक्षण:

  • जड़ो में गुच्छे से दिखते है और गांठे होती है और जड़ फूली हुई सी दिखती है।
  • पौधे बोने होते है, और पोषक तत्व की कमी के कारण पौधे पिले पड़ जाते है।
  • पौधे कमजोर होके झुकने लगते है।
  • संक्रमित पौधे की बाली में दाना नहीं बनता है।

 निमेटोड्स (Nematodes) का प्रभाव:

निमेटोड्स (Nematodes) पौधे की जड़ो को प्रभावित करके फसल को नुक्सान पहुँचता है। यह अगर ज्यादा शख्या में हो तो मिट्टी में पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व और पानी माजूद होने पर भी पौधे उन्हे ग्रहण नहीं कर पाते है जिससे उत्पादन और गुणवत्ता कम हो जाती है। जिन पोधो में ये दिक्क्त होती है उनमे उखेड़ा/फंगस रोग जल्दी लगते है। इसका प्रभाव से सब्जियों वाली फसल, आलू , सोयाबीन, मक्का धान, गेहू, फलो के बागो, मूंगफली, दालों, फलीदार फसलों पर काफी नुक्सान होता है।

निमेटोड्स (Nematodes) से नियंत्रण:

  • खेत में फसल लगाने से पहले अच्छे से जुताई करे। गर्मियों में मई-जून में 2-3 बार खेत की जुताई करे।
  • उन किस्मो का प्रयोग करे जो इसके प्रतिरोधी हो।
  • फसल में एक ही फसल बार बार न लगाए, फसल चक्र की प्रणाली इस्तेमाल करे। फसल चक्र के बारे में जानने के लिए यहा क्लिक करे
  • एक खेत से दूसरे खेत में औजारों को इस्तेमाल करने से पहले अच्छे से साफ़ कर लेना चाहिए, जिससे की अगर एक खेत में निमेटोड की दिक्कत हो तो वो दूसरे खेत में ना जा पाए।
  • निमेटोड वाला पौधे को उखाड़ कर खेत व उसके आस पास न फैके।

रसायनिक निंयत्रण:

नर्सरी: जिन फसल को रोपाई द्वारा लगाया जाता है उन्हे नर्सरी में ही उपचारित कर लेना चाहिए, पौध की जड़ो को 0.05 फीसदी ट्राइजोफोस के घोल में रोपाई से 6 घंटे पहले भिगो लेना चाहिए या फिर कार्बोसल्फोन 25 EC 500 पीपीएम से 6 घंटे तक उपचारित करके खेत में पौध लगाए।

खेत में दवा का प्रयोग: जमींन में इस समस्या से आने से पहले या फिर आने की शुरुवात में ही उपचार कर लेना चाहिए इसके लिए –

  • फोरेट 10 CG – 5 -10 किलोग्राम प्रति एकड़
  • कार्बोफ्यूरान 3G – 5 किलोग्राम प्रति एकड़

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