धान की खेती की जानकारी – कैसे करे धान की उचित तरीके से बुवाई और रोपाई

खरीफ फसलों में मुखयत धान की फसल पूुरे भारत में लगाए जाती है। भारत में उत्तर प्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल,आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, तेलांगाना,बिहार व छत्तीसगढ़ प्रमुख धान उत्पादक राज्य हैं।धान की बुवाई मुख्यत 2 तरीको से की जाती है, पहली जिसमे किसान सीधा बीज की बुवाई खेत में कर देते है और दूसरा जिसमे पहले धान की नर्सरी बनाए जाती है। अलग-अलग क्षेत्रों की स्थिति के हिसाब से ये तरीके अपनाए जाते है। ज्यादातर किसान मई में ही नर्सरी तैयार कर देते है ताकि जून -जुलाई में मोनसून आते ही किसान धान की रोपाई पूरी दे । आइये जाने हमे कोनसी बातो पर ध्यान देना जिससे की हम धान का उत्पादन पा सकते है।

सीधी बुवाई विधि:

  • इसमें किसान बीज सीधा खेत में डालता है। ज्यादातर मैदानी क्षेत्रों में इस तरीके से बिजाई की जाती है, इस विधि द्वारा हम धान के पोधो की संख्या निर्धारित नहीं कर सकते है।
  • इसमें किसान 40-50 किलो बीज प्रति हेक्टेयर में उपयोग करता है।
  • बिजाई से पहले 18-24 घंटो तक बीजो को पानी में भीगा कर रखना चाहिए जिससे की बीज अंकुरित हो सके।
  • बीज को उपचारित करने के लिए आप फफूदीनासक दवाई का उपयोग करे जिससे बीज में फंगस लगने की वजह से खराब नहीं होगा
  • बीज को उपचारित करने के लिए स्ट्रेप्टोमाइसिन दवाई के उपयोग करना चाहिए, एक ग्राम सेप्ट्रोसाइक्लिन जीवाणुनाशी के घोल को दस लीटर पानी में मिलाएं और इस घोल में पांच किलोग्राम बीज को 18 घंटे तक भिगोकर रखें।
  • खरपतवार नियत्रण के लिए प्रेटिलाक्लोर 30.7 प्रतिशत ई०सी० का उपयोग करे। इसकी 1.25 लीटर की मात्रा का एक हेक्टेयर में प्रयोग करे 500 लीटर पानी में घोल बनाकर स्प्रे करे।

धान की रोपाई विधि :

  • नर्सरी लगते समय बीज को 2 सेंटीमीटर से ज्यादा गहराई में न बोये उस से कल्ले अच्छे और ज्यादा नहीं निकलते है।
  • 21 -30 दिन की नर्सरी के बाद रोपाई करनी चाहिए। ज्यादा दिनों तक नर्सरी नहीं रहनी चाहिए।
  • रोपाई करने से पहले खेत को अच्छे से जोत ले और खेत में पानी भरकर अच्छे से पड¨लग कर ले।
  • उर्वरक और खाद की मात्रा धान की किस्मो के आधार पर इस्तेमाल करे।
  • गोबर की खाद इस्तेमाल करेंगे तो ज्यादा लाभ मिलेगा। अगर गोबर की खाद डाली है तो यूरिया की मात्रा कम कर दे।
  • खरपतवार दवाई का इस्तेमाल करते समय खेत में पानी होना चाहिए और 5-6 घंटो तक बारिश नहीं होनी चाहिए।
  • एक जगह पर 2-3 पौधे लगाए जाए अगर बुवाई देर से की हो तो 3-4 पौधे लगा सकते है।
  • पौधे से पौधे की दूरी 15 *15 सेंटीमीटर होनी उत्तम होती है ।
  • पोधो को खेत में सीधा लगाए अगर तिरछा लगेगा तो पौधा अच्छे से विकसित नहीं हो पाएगा। और पानी की मात्रा ज्यादा नहीं होनी चाहिए , पौधा पूरी तरह से नहीं डूबना चाहिए।
  • खेत में रोपाई से पहले 2 बैग सिंगल सल्फर फॉस्फेट (ssp), 30 किलो मुराते पोटाश, 20 किलो यूरिया और 15 किलो जिंक फॉस्फेट का इस्तेमाल 1 एकड़ के लिए करे।
  • खरपतवार नियंत्रण के लिए प्रेटिलाक्लोर 50 प्रतिशत ई०सी० का 1.60 लीटर का उपयोग प्रति हेक्टेयर पर प्रयोग करे और ब्यूटाक्लोर 50 प्रतिशत ई०सी० का 3-4 लीटर प्रति हेक्टेयर में 500 लीटर पानी में घोल बनाकर स्प्रे करे।

अगर धान की खेती सही तरीको से करी जाए तो किसानो को ज्यादा मुनाफा होगा।

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