अब किसान पा सकते है गुलाब की खेती कर लाखो का मुनाफा – आइये जाने कैसे करे गुलाब की खेती


सुगंधित गुलाब, सुगंधित तेल देने वाली महत्वपूर्ण फसल है। कई किसान गुलाब की खेती करके काफी ज्यादा मुनाफा कमा रहे है। ताजे चुने हुये फूलों का आसवन करके तेल निकाला जाता है जिसका उपयोग उद्योग में किया जाता है। गुलाब का इस्तेमाल औसधि बनाने, घरो और मंदिरो में पूजा के लये औैर किसी को उपहार देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। आज कल गुलाब का बहुत इस्तेमाल सन्दर्यों बढ़ाने के उतपादो में भी किया जाता है। गुलाब को लगाने का समय मानसून के दिनों में जुलाई, अगस्त व सितंबर है। आइये जाने कैसे करे गुलाब की खेती जिससे आप ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमा सके।

जलवायु:

गुलाब के पौधे के उत्तम विकास के लिए सूर्य के प्रकाश की आवश्यकता होती है। गुलाब की फसल लगाने के लिए दिन का तापमान 25 से 30 डिग्री सेंटीग्रेट तथा रात का तापमान 12 से 14 डिग्री सेंटीग्रेट उत्तम माना जाता है।

भूमि का चयन व तैयारी:

  • गुलाब की खेती हल्की (रेतीली), मध्यम (चिकनी बुलई) और भारी चिकनी मिट्टी में आसानी से की जाती है।
  • इसके साथ ही मिट्टी में अच्छी तरह जल निकसी होना चाहिए।
  • मिट्टी का pH मान 6 से 7.5 होना चाहिए।
  • बुवाई के पहले 3 -4 बार जोतकर भूमि को तैयार कर लेना चाहिए।
  • एक महीने पहले ही गोबर की खाद क्यरिओ में डाल देनी चाहिए।

गुलाब की क़लम लगाने की तैयारी:

  • खेत में लगभग 40 से.मी. व्यास और 40 से.मी. गहरें गड्ढें खोदे जाते हैं।
  • गड्ढ़े पर्याप्त रुप से बड़े होना चाहिए ताकि जड़ों को फैलाकर लगाया जा सके।
  • बुबाई के बाद गड्ढों को मिट्टी और खाद से भर देना चाहिए।
  • पोधो की किस्मे के अनुसार ही उनके बिच का फासला रखे, पर औसतन दूरी दो पौधों के बीच 1 -1.5 मी होती है।
  • रोपण के बाद सिंचाई की जानी चाहिए।

नर्सरी बिछौना तैयारी

  • अच्छे गुणवत्ता वाली गुलाब की खेती के लिए अच्छी तरह से नर्सरी तैयार की जानी चाहिए,पौधों को नर्सरी में 10 X 45 से.मी. की दूरी पर लगाना चाहिए।
  • भूमि की सतह से 15 सेंटीमीटर की उचाई पर पौधे की रुपाई करनी चाहिए।रोपण के समय सावधानी रखना चाहिए कि कलम का निचला हिस्सा नीचे रहे और ऊपरी हिस्सा ऊपर रहे।

खाद व उर्वरक:

  • गुलाब के फूलों की सफल उत्पादन के लिए जैविक खाद का प्रयोग करना चाहिए।
  • रोपाई के समय N यानी नाइट्रोजन की आधी खुराक और प (फॉस्फोरस) और K (पोटैशियम) की पूरी खुराक मिट्टी में मिलाकर देना चाहिए और शेष N की खुराक रोपाई के बाद देना चाहिए।
  • दीमक ने लगे उसके लिए कलोरोप्यरीफोस दवाई के प्रयोग करना चाहिए। इसको आप सीधा मिटी या खाद में मिलाकर डाल सकते है। पौधे की सहनशक्ति को बढ़ाने के लिए घुलनशील जड़ उत्तेजक 100 ग्राम को 100-150 लीटर पानी में डालकर प्रति एकड़ स्प्रे करे।

गुलाब की कुछ उत्तम किस्में :

  • राजहंस
  • जवाहर
  • बिरगो
  • गंगा सफेद
  • मृगालिनी गुलाबी
  • मन्यु डिलाइट नीला
  • मोटेजुमा
  • चार्लस मैलारिन गाढ़ा लाल
  • फलोरीवंडा समूह की चंद्रमा सफेद
  • गोल्डन टाइम्स पीला व जगुआर
  • बटन गुलाब समूह की क्राई-क्राई
  • देहली स्कारलेट
  • लता गुलाब समूह के देहली व्हाइट
  • पर्ल
  • डीरथा पर्मिन

सिंचाई व जल प्रबंधन :

  • सिंचाई रोपण के 20-30 दिनों के बाद करना चाहिए।
  • बरसात के मौसम से पहले नियमित रूप से सिंचाई करना चाहिए।
  • आवश्कता अनुसार गर्मी में 5-7 दिनों के बाद और सर्दिओ में 10 – 12 दिनों बाद सिचाई करते रहना चाहिए
  • ड्रिप सिचाई गुलाब की खेती के लिए लाभदायक होती है।

घसपात नियंत्रण प्रबंधन:

रोपण के पहले चरण में निंदाई की आवश्यकता होती है। नवंबर से जनवरी तक 2-3 बार निंदाई करना चाहिए। पौधे के अच्छे विकास के लिए एक वर्ष में 3-4 बार निंदाई करना चाहिए।

रोग व कीट नियंत्रण:

रोग : आल्टरनेरिया आल्टरनेटा (पर्ण अंगमारी ) यह रोग वैक्टीरिया द्दारा होता है जो पौधे के ऊतकों को नष्ट कर देती है । पत्तियों पर धब्बे पड़ने से पत्तियाँ कमजोर पड़ जाती है।

तुडाई, फसल की कटाई :

  • तुड़ाई के लिए उचित समय प्रात: काल का होता है।
  • दोपहर के बाद का समय तुड़ाई के लिए उपयुक्त नहीं होता है।
  • तुड़ाई के तुरंत बाद फूल आसवन के लिए भेजना चाहिए।
  • सफ़ेद, गुलाबी लाल रंग के फूलो की अध् खुली पखुड़िआ में जब ऊपर की पखुड़िआ निचे की और मुड़ना शुरु हो जाए तब फूल काटना चाहिए।
  • फूलो की कटाई करते समय किसी बर्तन में पानी के साथ रखना चाहिए जिससे फूलो को काटकर पानी में तुरंत रखा जा सके।
  • तोड़े हुए फूलो को कम से कम 3 घंटे पानी में रखने के बाद ग्रेडिंग के लिए निकलना चाहिए।

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