अब किसान कम पानी में कर सकते है बेहतर खेती ड्रिप इरीगेशन से और पा सकते है ज्यादा उत्पादन

ड्रिप इर्रिगेशन सिंचाई की एक नई विशेष विधि है जिसमें पानी और खाद दोनों की बचत होती है। इस विधि में पानी को पौधों की जड़ों पर बूँद-बूंद करके पहुंचाया जाता है जिससे खाद और उर्वरक का अधिकतम उपयोग होता है। इसे बूँद-बूँद सिंचाई या टपक सिंचाई भी कहते है। इसमें पानी थोड़ी-थोड़ी मात्र में, कम अन्तराल पर, प्लास्टिक की नालियों द्वारा सीधा पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है। परम्परागत सिचाई मे पोधो को प्राप्त जल नहीं मिल पाता था क्योकि वो जल जमीन में रिस कर या वाष्पीकरण के कारण व्यर्थ चला जाता है। ये सिचाई ऐसे क्षेत्रों के लिए अति लाभदायक है जहा सिचाई के लिए जल की कम सुविधा होती है।

आज हम जानेगे कैसे आप कैसे ड्रिप इर्रिगेशन सिंचाई का उपयोग कर आप क्या लाभ उठा सकते है

  • ड्रिप इर्रिगेशन से सिचाई के इस्तेमाल से समय और मजदूरी में होने वाला खर्च भी कम होता है.
  • पौधे की जडो को पानी सपर्याप्त मात्र में मिलता है।
  • जमीन में हवा व पानी की मात्रा उपयुक्त बनी रहने से फसल की वृद्धि एक समान रूप से और तेज़ी से होती है।
  • इसमें पानी धीरे धीरे पौधे तक पहुंचाया जाता है,ताकि पौधे की जड़े अच्छे से पानी का उपयोग कर सके ।
  • इस सिंचाई में पेड़ पौधों को प्रतिदिन जरूरी मात्रा में पानी मिलता है। इससे उन पर तनाव नहीं पड़ता। फलस्वरूप फसलों की बढ़ोतरी व उत्पादन दोनों में वृद्धि होती है।
  • इस सिंचाई से फसलों के उत्पादन में 20% से 50% तक बढ़ोतरी संभव है।
  • इस सिंचाई द्वारा 30 से 60 प्रतिशत तक सिंचाई पानी की बचत होती है।
  • ड्रिप इर्रिगेशन द्वारा जल के कम रिसाव वाली जमीन, क्षारयुक्त,ऊबड़-खाबड, बंजर जमीन शुष्क खेती वाली, और कम वर्षा क्षेत्रों वाली जमीन और समुद्र तटीय जमीन भी खेती हेतु उपयोग में लाई जा सकती है।
  • पोषकतत्व या उर्वरक बराबर मात्र में सीधे पौधोंकी जडों में पहुंचाऐ जाते हैं, जिसकी वजह से पौधे पोषक तत्वोंका उपयुक्त इस्तेमाल कर पाते हैंजिससे पैदावार में वृद्धि होती है। इस सिचाई से 30 से 45 प्रतिशत तक रासायनिक खाद की बचत की जा सकती है।
  • पानी सीधे फसल की जड़ों में दिया जाता है जिससे आस-पास की जमीन सूखी रहने से खरपतवार विकसित नहीं होते। इससे जमीन के सभी पौष्टिक तत्व केवल फसल को मिलते हैं।
  • इससे पेड़-पौधों का स्वस्थ विकास होता है जिनमें कीट तथा रोगों से लड़ने कीज्यादा क्षमता होती है अर्थात कीटनाशकों पर होने वाले खर्चे में भी कमी होती है।
  • इस सिंचाई पद्धति उपयोग के कारण जड़ के क्षेत्र को छोड़कर बाकी भाग सूखा रहने से निराई-गुड़ाई, खुदाई, कटाई आदि काम बेहतर ढंग से किये जा सकते हैं। इससे किसान के मजदूरी, समय और पैसे तीनों की बचत होती है।

सरकार द्वारा ड्रिप इरीगेशन पर सब्सिड़ी
अब राज्य सरकार और केंद्र सरकार ड्रिप इरीगेशन के सेट अप के लिए सुविधा उपलब्ध करा रहे है । अलग आग राज्य में किसान की जमीन हिसाब से सब्सिड़ी की मात्रा तय की गए है। अगर आप इसकी पूरी जानकारी चाहते है तो अपने नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय में जाकर इसकी पूरी जानकारी लेकर लाभ उठा सकते है।

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