सरसों की खेती – ज्यादा उतपदन के लिये जाने बिजाई से कटाई तक की पूरी जानकरी

सरसो एक तिलहनी फसल है, जिसका इस्तेमाल तेल प्राप्त के लिये किया जाता है। सरसो का तेल और बीज रसोई घर में काम आते है, बात करे सरसो के पत्तो की तो उसका इस्तेमाल सब्जी बनाने के काम आते है। सरसो की खल भी बनाई जाती जाती है, जो दूध देने वाले पशुओ के आहार में शामिल की जाती है। सरसो के पौधे का ऐसा कोई भी हिस्सा नहीं है जिसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल में तो इसकी खेती ज्यादा मात्रा में तो की ही जाती है साथ ही आसाम, उड़ीशा, बिहार, पच्छिम बंगाल, मध्यप्रदेश में भी होती है। तेल वाली सरसो में पिली सरसो, भूरी सरसो, तोरिया और राई आदि का उपयोग किया जाता है। आज हम बात करेंगे सरसो की खेती की जरुरी बातो और उन्नत किस्मो के बारे में, सरसो की खेती की पूरी जानकारी के लिये अंत तक पढ़े।

उपयुक्त मिट्टी और जमीन की तैयारी

  • सरसो की खेती रेतीली मिट्टी से लेकर भारी मिट्टी तक की जा सकती है, लेकिन बलुई दोमट मिट्टी सरसो की फसल के लिये सबसे उत्तम मानी जाती है।
  • खेत की तैयारी करते समय हल से मिट्टी को अच्छे से पलटे, 2-3 जुताई कल्टीवेटर या हल से करे। जुताई करने के बाद खेत में सुहागा लगा खेत को समतल कर दे।

बिजाई

  • सरसो की बिजाई का उपयुक्त समय सितम्बर से अक्टूबर है।
  • पिली सरसो की बिजाई अक्टूबर से नवम्बर तक की जाती है।
  • पंक्ति से पंक्ति की दूरी 40 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10-12 सेमी तक हो।
  • बीज की 4-5 सेंटीमीटर तक गहराई में बिजाई करे।

बीज का चयन और बीज दर

बीज का चयन अपने क्षेत्र के हिसाब से करे। एक एकड़ में 1.5 किलोग्राम तक बीज काफी होता है और अगर मिट्टी की स्थिति अच्छी ना हो तो 10 प्रतिशत तक बीज दर बड़ा दे।

बीज उपचारण

बिजाई से पहले बीज को उपचारित जरूर कर लेना चाहिए, जिससे की बीज के अंकुरित होने के अवसर बढ़ जाएगे। इसके लिए 3 ग्राम थीरम से 1 किलोग्राम बीज को उपचार करे या फिर मनकोजेब, साफ, कैपटान, विटवॉक्स का भी इस्तेमाल कर सकते है।

सरसो की उन्नत किस्मे

RH-30

  • बिजाई का समय – 15 सितम्बर से 20 अक्टूबर
  • पौधे की लम्बाई – 6 से 6.5 फ़ीट
  • फसल का कुल समय – 130 से 135 दिन
  • उपज – 9 से 10 क्विंटल प्रति एकड़
  • विशेषताएं – पकने के समय फलियां नहीं झड़तीं

पायनियर 45s46

  • बिजाई का समय – सितम्बर से अक्टूबर
  • बीज दर – 1.5 किलो प्रति एकड़
  • राज्य – उत्तरभारत (पंजाब, हरयाणा, राजस्थान, उत्तरप्रदेश)
  • पौधे की लम्बाई – 5 फ़ीट
  • कुल सिचाई – 2 से 3
  • फसल का कुल समय – 125 से 130 दिन
  • उपज – 12 से 15 क्विंटल प्रति एकड़

पायनियर 45s42

  • राज्य – उत्तरभारत (पंजाब, हरयाणा, राजस्थान, उत्तरप्रदेश)
  • बिजाई का समय – सितम्बर से अक्टूबर
  • पौधे की लम्बाई – 4.5 से 5 फ़ीट
  • फसल का कुल समय – 125 से 130 दिन
  • उपज – 11 से 12 क्विंटल प्रति एकड़

टी-59 (वरुणा)

बिजाई का समय – 15 सितम्बर से 15 अक्टूबर
फसल का कुल समय – 140 से 145 दिन
उपज – 8 से 9 क्विंटल प्रति एकड़

RH-8812 (लक्ष्मी)

  • बिजाई का समय – 15 सितम्बर से 15 अक्टूबर
  • फसल का कुल समय – 140 से 145 दिन
  • उपज – 9 से 10 क्विंटल प्रति एकड़
  • विशेषताएं – इसकी फलिया मोटी होती है साथ ही बीज का आकार मोटा और काला होता है।

RH-781

  • बिजाई का समय – 15 सितम्बर से 15 अक्टूबर
  • फसल का कुल समय – 135 से 140 दिन
  • उपज – 7 से 8 क्विंटल प्रति एकड़
  • विशेषताएं – यह किस्म पाला और सर्दी के प्रति सहनशील होता है।

पूसा सरसो 26

  • बिजाई का समय – 15 सितम्बर से 15 अक्टूबर
  • फसल का कुल समय – 120 से 126 दिन
  • उपज – 6 से 8 क्विंटल प्रति एकड़
  • विशेषताएं – यह किस्म पाला और सर्दी के प्रति सहनशील होता है।

पूसा सरसो 25

  • बिजाई का समय – 15 सितम्बर से 15 नवम्बर
  • फसल का कुल समय – 100 से 110 दिन
  • उपज – 6 से 7 क्विंटल प्रति एकड़

प्रोएग्रो 5121 (बायर 5121)

  • बिजाई का समय – 15 सितम्बर से 15 नवम्बर
  • पौधे की लम्बाई – 5 से 7 फ़ीट
  • फसल का कुल समय – 130 से 140 दिन
  • उपज – 13 से 15 क्विंटल प्रति एकड़
  • विशेषताएं – इस किस्म में तेल की मात्रा 42 प्रतिशत तक होती है।

माहिको MRR 8020

  • बिजाई का समय – सितम्बर से अक्टूबर
  • पौधे की लम्बाई – लगभग 6 फ़ीट
  • फसल का कुल समय – 125 से 130 दिन
  • उपज – 10 से 12 क्विंटल प्रति एकड़
  • विशेषताएं – एक बाली में 18 दानो तक होते है, कम नमी वाली मिटी में इसको लगाया जा सकता है।

श्रीराम 1666

  • बिजाई का समय – सितम्बर से अक्टूबर
  • फसल का कुल समय – 130 से 135 दिन
  • उपज – 9 से 10 क्विंटल प्रति एकड़

सरसो की खेती में खाद और उर्वरक

खेत की तैयारी के समय गोबर की खाद जरूर डाले जिसके लिये 50-60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर प्रयोग करे। अगर खेत में सिंचित व्यवस्था सही हो तो एक हेक्टेयर में 120 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फॉस्फोरस और 60 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर इस्तेमाल करे। नाइट्रोजन की केवल आधी मात्रा बुवाई से पहले डाले और बाकी 25-30 दिनों के बाद बाद खेत में प्रयोग करे।

सरसो की खेती में खरपतवार रोखथाम

खेत में निराई-गुड़ाई अच्छे से कर ले जिससे की बिना रसायन के इस्तेमाल से खरपतवार खत्म हो जाए। पहली और दूसरी सिचाई के बाद निराई-गुड़ाई कर सकते है। पेन्डामेथलिन 30 EC का प्रयोग बुवाई के 72 घंटे के भीतर बीज अंकुरित होने से पहले खेत में करना चाहिए, 3.3 लीटर 800-1000 लीटर पानी में मिला कर 1 हेक्टेयर में इस्तेमाल करे।

सरसो की खेती में सिंचाई

सरसों की फसल में जितने अच्छे से सिंचाई होगी उतनी ही पैदावार में बढ़वार देखने को मिलेगी। सरसो की फसल में 3-4 बार सिंचाई की आवश्य्कता होती है। 20-25 दिनों के अंतराल में सिचाई करते रहना चाहिए। यदि पानी की व्यवस्था सही हो तो एक सिचाई दाना पकते समय जरूर करे।

फसल की कटाई

सरसो की फसल 120-150 दिनों में पक कर तैयार हो जाती है। अगर कटाई देरी से हो तो फलिया चटकने लगती है जिससे उपज में 5-8 प्रतिशत  तक का नुक्सान हो जाता है। जब पौधे और फलिया पिली पड़ना शुरू हो जाये तो समझ जाए कटाई का सही समय शुरू हो गया है। बीजो को सुखाने के बाद बोरियो में भर दे।  

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