भैंस पालन में ज्यादा दूध उत्पादन के लिये रखे किन जरुरी बातो का ध्यान आइये जाने

डेयरी बिज़नेस में भैंस पालन बहुत फायदेमद होता है। भैंस के दूध की मार्किट में काफी मांग होती है, देश में 55% दूध हमे भैंस पालन से मिलता है। भैंस पालन करते समय पशुपालक को भेंसो की पूरी जानकरी होना आवश्यक तभी ज्यादा दूध उत्पादन प्राप्त होगा और अच्छा मुनाफा मिलेगा। अगर आप डेयरी बिज़नेस करने के सोच रहे है या कर रहे है तो भैंस पालन में उन्नत नस्ल चुनने से उनके रख रखाव कुछ जरुरी बातो का रखे ध्यान आइये जाने भैंस पालन में जरुरी बाते 

भैंस की उन्नत नस्ल

भैंस पालन में अच्छी नस्ल चुनाव करना काफी आवश्य्क होता है तभी दूध उत्पादन भी ज्यादा मिलता है। मुर्रा, सुरती, जाफराबादी, मेहसना, भदावरी, नागपुरी, टोड़ा, साथकनारा, नागपुरी आदि भैंस की प्रमुख नस्ले है। मुर्रा विश्व की सबसे अच्छी भैंस की नस्ल है, प्रथम ब्यात इसमें 40 से 45 महा में होता है और इसके दूध में फैट की मात्रा जायदा होती है। यह नस्ल हरियाणा, पंजाब और दिल्ली में पायी जाती है। एक दिन में इससे 15 से 20 लीटर तक दूध मिलता है। भैंस की एक और नसल है जो है सुरती जो की गुजरात में मुख्यत पायी जाती है, यह एक ब्यांत में लगभग 900 – 1300 दूध देती है।

मुर्रा भैंस

भैंस के लिये अच्छे बाड़े का प्रंबध 

भैंस की देखभाल अगर अच्छे से करना चाहते है तो इसमें सबसे जरुरी है की बाड़ा आरामदयाक होना बहुत जरुरी है। बाड़ा इस प्रकार से तैयार करे की वो सभी मौसम के अनुसार भैंस के लिये अनुकूल हो साथ हवा आने की सही व्यवस्था हो। बाड़े में सीलन न आये इस बात का ध्यान रहे और वहाँ सफाई का पूरा ध्यान रखा जाए। जितना आरामदायक बाड़ा होगा उतना ही पशु की सेहत के लिये अच्छा होगा जिससे दूध उत्पादन भी सही रहेगा।

संतुलित आहार

 भैंस की उन्नत नसल होने पर भी अगर आप उसे अच्छा आहार नहीं दे रहे है तो उस से उसके दूध में भी कमी आ सकती है। जितना पोषक तत्वों से भरपूर पशु को आहार मिलेगा उतना ही उसका दूध उत्पादन अच्छा होगा। पशु को आहार उसकी उम्र, वजन, दूध उत्पादन क्षमता के हिसाब से देना बहुत आवश्यक है। जैसे मनुष्य को शरीर के विकास के लिये कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन्स और अन्य खनिज लवणों की आवशयकता होती है वैसे ही पशुओ को भी होती है। हरे चारे के साथ-साथ पशुओ के आहार में खल, चुरी, गेहू का चोकर, सोयाबीन चुरी, चना चुरी या चना टुकड़ा, फीड इत्यादि शामिल करे।

Binola khal
Chana churi
Mineral Mixture
  • भेंसो के लिये कार्बोहाइड्रेट के लिये हरा चारा, भूसा आदि अच्छी मात्रा में दे।
  • प्रोटीन के लिये भैंस को खल, चना और फलीदार चारा जैसे की ग्वार, लोभिया, बरसीम आदि खुराक में शामिल करे।
  • भैंस में अच्छे दूध की गुणवत्ता के लिये भैंस के शरीर में वसा की कमी नहीं होनी चाहिए। वसा के मुख्यत स्रोत है बिनौले की खल, तिल की खल, सरसो की खल, सोयाबीन चुरी (पिसा हुआ सोयाबीन) है।
  • भैंस में अगर खनिज लवणों की कमी हो जाती है तो उस से दूध में गिरवाट आती है। कैल्शियम, सल्फर, मैग्नीशियम, क्लोरीन, कोबाल्ट, जिंक, आयोडीन, सेलेनियम, आयरन, मैगनीज़ इत्यादि ऐसे तत्व है जो शरीर की गतिविधियों के लिये बहुत आवश्य्क होते है। भेंसो में जायदातर कैल्शियम और आयरन की कमी पायी जाती है जिससे दूध ज्वर जैसी परिस्थितया उत्पन हो जाती है और पशु का दूध कम हो जाता है। कई बार पशु को चारे से सारे खनिज प्राप्त नहीं हो पाते है जिसके लिये आप उन्हे मिनरल मिक्सचर या चिलेटेड मिनरल मिक्सचर दे सकते है जो विभिन कम्पनिया बनती है जैसे वीरबैक (virbac pharmaceutical) , हिमालयन (Himalaya), वाणीसर (vanisar) आदि।

भैंस पालन में रोग नियंत्रण

पशुओ को रोगो से बचा कररखना चाहिए, हो सके तो पहले से ही पशुओ को बीमारी से बचाने के लिये टिके लगा देने चाहिए। भेंसो में खुरपका रोग, मुहपका, गलघोटू, थनेला, पेट में कीड़ो की समस्याओं वाले रोग सामान्य पाए जाते है जिसका सीधा प्रभाव दूध उत्पादन में पड़ता है।

गलघोटू जीवाणु के कारण होता है जिसमे पशु को तेज बुखार, सांस लेने में तकलीफ, लार बहना, आँखे लाल होने जैसे लक्षण होते है, रोग से बचाव के लिये ओक्सीटेट्रासाईक्लीन (Neoxyvita Forte -निओक्सीविटा फोर्ट) जैसे एंटी बायोटिक कारगार साबित हुआ है। वर्ष में दो बार इसका टिका पशु को जरूर लगवाए।

थनेला रोग – यह जीवाणु जनित रोग है, जो की मौसम में नमी के होने से और भी जल्दी फैलता है। इसमें थानों में सूजन आ जाती है और पशु का दूध पिने योग्य नहीं रहता है। गंदे हाथो से दूध निकालना, थनो में चोट लगना, पशु के शरीर की अच्छे से साफ़ सफाई न होना आदि इसके होने के कारण है। इस से बचाव के लिये है थनो की नियमित सफाई करे, बाड़े को साफ़ सुथरा रखे, फर्श में नमी न रहने दे, दूध निकालने से पहले हाथो के अच्छे से धो ले, थानों में सूजन या गाठ दिखने पर पशुचिकित्सिक को सम्पर्क करे।

पशुपालन के अधिक जानकारी और अच्छे प्रबंधन के लिये आप अपने मोबाइल में ICAR-CIRB bhains Poshahar ( buffalo nutrition app ) ऐप की सहायता ले सकते है, जिसमे आपको भैंस के सही आहार के साथ उनकी देखभाल कैसे करनी है उसकी पूरी जानकारी होगी। यह ऐप हिंदी भाषा में उपलब्ध है, आप गूगल स्टोर से डाउनलोड कर सकते है। 

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