किसान बिल 2020 : लोकसभा से पास हुए बिल पर इतना हंगामा क्यों? क्या है सरकार का दावा और किसान क्यों सड़को पर उतरे इसके विरोध के लिए?

इस महीने लोकसभा में सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में तीन बिल पास किये गए है, जिसमे एक बिल 15 सितम्बर और 2 बिल 17 सितम्बर को घोषित हुए, जिनके ऐलान होते ही किसान और कई राजनैतिक दल इसके विरोध में उतर आये है। मोदी सरकार के मुताबिक यह बिल किसानो की आय को बढ़ाने के लिये कारगर साबित होंगे पर ऐसा अन्य विधायकों का मानना नहीं है, उनके मुताबिक निजी कंपनियों द्वारा इस से किसानो का शोषण और बढ़ जाएगा और राज्य सरकारों को नुक्सान भी होगा। आइये जाने कोन से बिल पास हुए है और उनका विरोध क्यों किया जा रहा है

 किसान उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) बिल 2020 (Farmers’ Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Bill 2020)

इस बिल के तहत किसान देश में कही भी अपनी फसल की उपज को बेच सकता है जिससे राज्य सरकार द्वारा बाहर बचने पर  किसी प्रकार का कर नहीं लगेगा। अगर किसान को अपने राज्य में उपज के अच्छे दाम नहीं मिल रहे है या फिर मंडी की सुविधा नहीं उपलब्ध हो पा रही है, तो अपने राज्य के बाहर फसल बेच सकेगा जिसमे वो ऑनलाइन माध्यम से भी फसल बेच पाएगा। सरकार के कहना है की यह बिल किसनो की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में कारागार साबित होगा। 

प्रधामंत्री मोदी किसानो को बताते हुए की यह बिल उन्हें के हित में है। 

विरोध का कारण

इस बिल के विरोध इसलिए किया जा रहा है क्योकि किसानो और विपक्ष राजनैतिक दलों का कहना है इस से MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) सिस्टम भी खत्म हो सकता है जिससे निजी कम्पनियो द्वारा किसानो का शोषण बढ़ सकता है। MSP में सरकार दवारा फसल का एक न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया जाता है अगर फसल के रेट गिरता भी है तो भी सरकार किसान की फसल तय किये गए मूल्य पर ही खरीदती है। इसमें राज्यों को नुसकान भी होगा वो मंडी शुल्क नहीं प्राप्त कर पाएगे। अगर व्यापर मड़ियो से बहार जाएगा तो इसका प्रभाव कमीशन एजेंटो पर पड़ेगा।

आवश्यक वस्तु (संशोधन) बिल 2020 (Essential Commodities Bill 2020)

इस बिल के अंतर्गत अनाज, दाल, प्याज़, आलू, तिलहन को आवश्यक वस्तुओ की सूचि से हटाने का फैसला लिया है। युद्ध, प्राकर्तिक आपदा, अकाल आदि जैसे असाधारण परिस्थितियों को छोड़ कर सामान्य समय में ही हटाया जाएगा। जिसमे इन वस्तुओ के भंडारण पर कोई रोक नहीं होगी। जिससे किसान देश के बाहर भी निर्यात करने में सक्षम होगा।

आवश्यक वस्तु

विरोध का कारण

इसका विरोध का सबसे बड़ा कारण ये की इससे निजी कम्पनियो और बड़े व्यापारियों  को इन खाद्य पदार्थो की भंडरान की छूट मिल जाएगी, जिससे फसलों की जमाखोरी शुरू हो जाएगी और बाजार में अस्थिरता उत्पान होगी और यह कृषि उत्पाद महंगे बिकने लगेंगे। किसान को लगता है इसका फायदा उन्हें कम होगा और निजी कम्पनियो को ज्यादा।

मूल्य आश्वासन तथा कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौता, 2020 (The Farmers (Empowerment and Protection) Agreement of Price Assurance and Farm Services Bill, 2020)

इस बिल के तहत किसान अपने कृषि उत्पाद पहले से निर्धारित मूल्यों पर बेचने के लिये थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं या निर्यातकों, व्यवसायी फर्मों से लिखित समझौता कर सकता है। इससे किसानो की आय में भी विर्धि होगी और किसानो को बिचोलियो पर निर्भर नहीं  रहना पड़ेगा जिससे सीधा फायदा किसान को मिलेगा।

विरोध का कारण

विपक्ष राजनैतिक दलों और किसान संगठनों इसके विरोध में है उनका मानना है की इस से किसान बाद में तोल – मोल नहीं कर पाएगे। निजी कम्पनिया और थोक विक्रेता ज्यादा मुनाफे के लिये किसानो का शोषण तो ना करने लगे।

इन बिलो के पास होने से कई किसान अपनी नराज़गी दिखा रहे है और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन भी कर रहे है।  किसान को डर है इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य खत्म ना हो जाये, और निजी कम्पनियो दवारा उनका शोषण ना होने लगे साथ ही कमीशन एंजेटों को ये बात सता रही है की कही उनका आय के स्रोत ना बंद हो जाए। पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र के कई इलाको के किसान इन बिलो के विरोध में खड़े है। वही सरकार का कहना है की इस से किसानो को इससे उपज के उचित दाम मिलेंगे। इससे निजी कम्पनियो के निवेश से कृषि  क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर में विकास होगा और रोजगार भी बढ़ेगा। किसानो को  फसल बेचने के लिये मंडियों के नियमो के अधीन होने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 

आपको क्या लगता है की मोदी सरकार द्वारा इन बिलो से किसान का फायदा होगा या फिर  किसान बड़े व्यापारियों या निजी कंपनियों  के आधीन होंगे ?

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