सरसों की फसल में लगने वाले रोग एव कीट और उनका नियंत्रण

सरसों की फसल उन फसलों में से एक है जो कम लागत और कम सिचाई व्यवस्था में भी अन्य फसलों की तुलना में अधिक लाभ देती है। सरसों की खेती का किसानो की आर्थिक स्थिति में महत्वपूर्ण योगदान रहता है। किसान इसकी खेती अकेले या दूसरी फसलों के साथ मिलाकर भी कर सकते है। सरसों की फसल में अनेक प्रकार के कीट का आक्रमण होता है जिससे फसल को भारी नुक्सान तक झेलना पड़ता है। बीज और भूमि जनित रोग भी फसल की उत्पादन पर प्रभाव डालते है। अगर रोगो का सही समय पर नियंत्रण कर लिया जाये तो नुक्सान से बचा जा सकता है और उत्पादन में बढ़ोतरी भी लाई जा सकती है। आज हम बात करेंगे सरसो की फसल में लगने वाले रोग और कीटो के बारे में और उनके नियंत्रण के बारे में इसलिय इसे अंत तक जरुरु पढ़े –

चेपा या माहु ​

यह कीट पौधे से रस चूसकर पौधे को सूखा देता है और फलियां को कमजोर बना देता है। खेत में ज्यादा मात्रा में नाइट्रोजन के इस्तेमाल से चेपा की दिक्क्त खेत में ज्यादा देखने को मिलती है, इसलिय नाइट्रोजन वाली खादों का प्रयोग कम करे

नियंत्रण 
  • इसके लिए थाइमैथोक्सम के 80 ग्राम 120-140 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ स्प्रे करे।
  • क्विनलफॉस 250 ml 120-140 लीटर पानी में मिलाकर एक एकड़ में स्प्रे करे।

chepa keet sarso me

बालो वाली सुंडी

यह सुंडी सरसो के पत्तो को खाकर पूरी तरह नष्ट के देती है। यह काले और नारंगी रंग की होती है और बालो से इनका पूरा शरीर भरा रहता है। यह खेत में बहुत ही जल्दी फैल जाती है।

नियंत्रण

  • डाईक्लोरोवास 76 प्रतिशत EC 200 ml को 100-130 लीटर पानी के साथ मिलाकर प्रति एकड़ स्प्रे करे।

  • क्यूनालफास 25 प्रतिशत EC 400 ml को 100 -130 लीटर पानी के साथ प्रति एकड़ स्प्रे करे।

baalo vali sundi

चितकबरी सुंडी

 यह कीट काले रंग के होते है जिसमे पिले और लाल रंग के धब्बे होते है। ये फसल को 2 बार नुसकान पहुंचाते है, एक तो फसल के शुरू के दिनों में और दूसरा फसल की कटाई के समय। फसल पकते समय यह फलियों से रस चूस कर दानो में तेल और वजन पर प्रभाव डालती है।

नियंत्रण

  • बिजाई से पहले बीज को कीटनाशक दवा से उपचारित जरूर करे।

  • अगर आपके क्षेत्र में यह समस्या फसल के शुरुवाती दिनों में आती है तो मेलाथियान 50 EC 200 ml को 160-200 लीटर पानी में मिलाकर एक एकड़ में स्प्रे करे।

  • फरवरी-मार्च में अगर आपको इन कीटो का प्रकोप देखने को मिले तो मेलाथियान 50 EC 400 ml को 400 लीटर पानी में मिलाकर एक एकड़ में स्प्रे करे।
चितकबरी सुंडी

आरा मखी

यह कीट फसल के अंकुरण होने के 7-12 दिनों के अंदर बहुत ज्यादा नुक्सान पहुँचता है। आरामक्खी की गिडारें काले रंग के होते है जो को पत्तो की विभन्न जगह से काट कर उमसे छेद कर देते है। इसका असर फसल के शुरू में छोटे पौधो में यह काफी देखने को मिलता है।

नियंत्रण

  • इंडोसल्फान 35 EC 400 ml दवा को 160-200 लीटर पानी में मिलाकर एक एकड़ में स्प्रे करे।
  • क्यूनालफास 25 EC 400 ml को 160-200 लीटर पानी में मिलाकर एक एकड़ में स्प्रे करे। 
aara mkhi

सफ़ेद रोली (वाइट रस्ट)

यह रोग भूमि एव बीज जनित रोग होता है। इसमें पतियों के निचे सफ़ेद रंग के फफोले से दिखना शुरू हो जाते है। ज्यादा फैलने पर यह धब्बे पत्तियों की ऊपरी सतहा पर भी हो जाते है। जब ये फफोले फटते है तो इनमे से सफ़ेद रंग का चूर्ण पत्तियों पर फेल जाता है। बिजाई से पहले ध्यान रखे की पिछली फसल के अवशेष खेत में ना हो।अगर यह फलियों  में फेल जाता है, तो दाना नहीं बनता जिससे फसल के उत्पादन में काफी नुक्सान होता है।

नियंत्रण

  • बिजाई से पहले बीज को फफूदीनासक से उपचारित जरूर कर ले, मेटालेक्सिल 6 ग्राम प्रति किलो की दर से उपयोग करे।
  • मैटालैक्सिल 8 प्रतिशत + मैनकोजेब 64 प्रतिशत 300- 350 ग्राम 150- 80 लीटर पानी में मिलाकर एक एकड़ में स्प्रे करे।

white rust

झुलसा रोग

यह रोग भी फफूदी के कारण की होता है, इसमें पौधे के पत्तियों, फूलो और तनो में पीले रंग के धब्बे पड़ जाते है। अगर यह पौधे मए पुरो तरह से फेल जाता है तो फलिया झड़ना शुरू कर देती है। बिजाई के समय ऐसी किस्म चुने जो इसमें प्रतिरोधी हो।

नियंत्रण

  • इंडोफिल एम-45 250 ग्राम 150 लीटर पानी में मिलाकर एक एकड़ में स्प्रे करे।
jhulsa rog

तना गलन रोग

यह रोग सरसो की फसल में बहुत देखने को मिलता है, इसमें सरसो के पौधे के तने में भूरे रंग के धब्बे हो जाते है जिनमे बाद में सफ़ेद फफूद की परत बन जाती है। अगर उपचार ना किया जाए तो इसमें तना फट जाता है और पौधा मुरझाकर गिर जाता है और खेत में नमी है तो यह और जल्दी फैलता है।

नियंत्रण

  • खेत में रोग के लक्ष्ण दिखने पर कार्बेन्डेन्ज़ीम 12 % + मैंकोजेब 63 % दवाई का इस्तेमाल करे।

तना गलन रोग

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