सितम्बर महीने में लगाएं जाने वाली फसले

भारत में तरह-तरह की सब्जिया और फसले उगाई जाती है, सभी फसलों का बीजाई और कटाई का समय अलग होता है। फसल की सही उपज और गुणवत्ता के लिये उसकी बिजाई सही समय पर होना बहुत जरुरी है। आइये जाने सितम्बर में कोन सी सब्जिया या फसले लगाई जाती है और उनकी उन्नत किस्मे

गाजर (Carrot)

गाजर की खेती ज्यादातर पंजाब, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, आंध्रप्रदेश और कर्नाटक राज्यों में की जाती है। गाजर एक जड़ वाली फसल है, गाजर की खेती हलकी मिट्टी में की जाती है साथ ही जल निकास वाली मिट्टी इस फसल के लिये बहुत आवश्यक होता है। खेत की तैयारी करते समय उसे उसकी 3-4 बार जुताई करनी चाहिए। गाजर की खेती के लिये एक हेक्टेयर में 5 -7 किलोग्राम बीज की आवश्कता होती है। गाजर की खेती में बिजाई के समय खेत में नमी होना जरुरी है। बिजाई के समय बीज की गहराई 1-1.5 सेंटीमीटर होनी चाहिए। 

फूलगोभी (Cauliflower)

सितम्बर में फूलगोभी की पछेती किस्मे लगाई जाती है जिसके लिये 400 – 450 ग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की आवश्कयता होती है। फूलगोभी की खेती के लिये दोमट और चिकनी मिट्टी दोनों ही उपयुक्त होती है और 15-20 डिग्री तामपान इस फसल के लिये उत्तम माना जाता है। इसकी उपज 200-250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। फूलगोभी की खेती में फूल निकलते समय मिट्टी में नमी की कमी नहीं होनी चाहिए। इसकी उत्तम प्रजातिया है पूसा सेन्थेटिक, बनारसी मागी, स्नोबाल- 16 , पूसा सनोबाल के-1, पूसा के-1 आदि।

काली सरसो (black mustard)

सरसो की खेती शीत मौसम में की जाती है, यह ज्यादातर सभी प्रकार की मिट्टी में उगाई जा सकती है। बिजाई से पहले खेत की अच्छे से जुताई के बाद सुहागा लगाना चाहिए और फिर खेत को समतल कर देना चाहिए। सरसो की खेती के लिए मिट्टी जितनी भुरभुरी होगी फसल के लिये उतना ही अच्छा होगा। सरसो की खेती के लिये बीज की मात्रा प्रति हेक्टेयर 5-6 किलोग्राम होती है और जिन इलाकों में पानी की व्य्वस्था कम हो वह बीज की मात्रा 10 -15 % बढ़ा दे। सरसो की उन्नत किस्मे Pioneer 45s42, पूसा अग्रणी, पूसा मस्टर्ड 24 , RH-30, पूसा बोल्ड, बायो 202, अरावली आदि 

धनिया (coriander)

धनिये की खेती के लिए बिजाई सितम्बर के आखिरी हफ्ते में शुरू हो जाती है। यह किसी भी प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है पर दोमट मिट्टी जिसमे निकास अच्छा होता है इसके लिये काफी अच्छी मानी जाती है। बिजाई की समय पौधे से पौधे दूरी 15 सेंटीमीटर रखे और कतार से कतार की दूरी 30 सेंटीमीटर होनी चाहिए।

धनिये की खेती की उपज शुष्क और ठंडा मौसम मेंअच्छी होती है। एक एकड़ में 8 -10  किलो बीज की आवयश्कता होती है। पहली सिचाई बिजाई के तुरंत बाद करिये और बाकी सिचाई 10 -15 दिनों के अंतराल में करनी चाहिए। जवाहर धनिया -1 , सिंधु, हरीतिमा,गुजरात धनिया -1, पंजाब सुगंध, सिम्पो एस 33 किस्मो की बिजाईकर सकते है। 

शलगम (Turnip )

शलगम की खेती के लिये बलुई या हल्की चिकनी दोमट मिट्टी उत्तम होती है। यह शीत ऋतु की फसल है जो ठंड और पाला सहन कर लेती है। शलगम की खेती के लिये 4-5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर इसकी बीज दर होती है। पौधे से पौधे की दूरी 6 -8 सेंटीमीटर होनी चाहिए। बिजाई के 15-20 दिन बाद पहली सिचाई करे और खेत की बाकी सिचाई 12 -15 दिन  के अंतराल में करते रहे।शलगम की खेती के लिये उत्तम प्रजातियां – पूसा कंचन,पूसा चंद्रिमा,पंजाब सफ़ेद – 4, स्नोबाल, पूसा स्वर्णिम,पूसा-स्वेती आदि।

मूली (Radish)

मूली की खेती सालभर की जाती है पर यह ठंड के मौसम की फसल है, इसकी बढ़वार के लिये 10 से 15 डिग्री तापमान उपयुक्त होता है। बिजाई से पहले 5 -6 बार खेत की अच्छे से जुताई कर लेनी चाहिए। बिजाई के लिये 10  से 12 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज पर्याप्त होता है।

सर्दियों में फसल की सिचाई 10 -15 दिनों के अंतराल में करे और गर्मियों के मौसम में 6 -7 दिनों के भीतर में करे। यह फसल 40 से 55 दिन में तैयार हो जाती है। मूली के बीज की उत्तम किस्मे पंजाब पसंद, जैपनीज़ वाइट, पंजाब हिमानी, पंजाब रेशमी, पूसा चेतकी, शीतल आर-50, आर-40, पंजाब देशी आदि।

पत्ता गोभी (Cabbage)

पत्ता गोभी की खेती के लिये जल निकास वाली मिट्टी होना जरुरी है। खेत की तैयारी के लिये 3 -4  बार जुताई करे और गोबर की खाद का उपयोग करे। इसकी बिजाई रोपाई विधि द्वारा करे, जब पौध 25 से 30 दिनों की हो जाए तो उसकी रोपाई कर दे। रोपाई करते समय पौधे से पौधे की दूरी 45 सेंटीमीटर रखे। एक एकड़ में 200 -250  ग्राम बीज की जरूरत होती है। उन्नत किस्मे की पैदावार 300 -350 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक हो जाती है। पत्ता गोभी की उन्नत किस्मे पूसा मुक्ता, गोल्डेन एकर, पूसा सिंथेटिक,बजरंग, हरयाणा आदि।

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