आइये जाने गेहूं की कोन सी किस्मों की बिजाई कर आप पा सकते है उपज में बढ़ोतरी ​

आइये जाने गेहू की कोन सी किस्मों की बिजाई कर आप पा सकते है उपज में बढ़ोतरी

गेहू की खेती एक मुख्य फसल है, भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा गेहू उत्पादक देश है। गेहूं की फसल के लिये चिकनी दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है, जो पानी को अच्छे से सोक सके। गेहू के अच्छे उत्पादन के लिये यह बहुत जरुरी है की अच्छी किस्म का चुनाव  किया जा सके जो की कई बीमारियों के प्रतिरोधी हो। अगर किसान बीमारियों के प्रतिरोधी किस्म का उपयोग करेंगे तो दवाइयों पर ख़र्चा कम होगा और उत्पादन भी ज्यादा होगा। इसलिय आज हम आपको बताएगे गेहू की उन्नत किस्मो के बारे में जो उत्पादन में भी अच्छी है और कई बीमारियों की प्रतिरोधी भी है। 

HD-2236

HD-3086

  • इस किस्म के पौधों की लम्बाई 80 से 85 सेंटीमीटर तक की होती है।
  • यह किस्म 110 -115 दिन तक की फसल होती है।
  • एक एकड़ में लगभग पैदावार 12-15 क्विंटल तक की होती है। 
  • इसका बिजाई का समय अक्टूबर से नवंबर है।
  • यह किस्म  प्रति एकड़ 23 क्विंटल तक की उपज देती है।
  • यह किस्म पीला रतवा और भूरा रतवा बीमारियो के प्रतिरोधी होती है।
  • यह 140 -145 दिन में पक कर तैयार हो जाती है।

HD 2967

DBW 17

  • इस किस्म के पौधों की लम्बाई 100 सेंटीमीटर तक होती है।
  • इसके दाने सुनहरे और चमकदार होते है।
  • यह 150 -157 दिनों में तैयार होती है।
  • इसकी प्रति एकड़ 21-22 क्विंटल तक होती है।
  • यह 150 -155 दिन में तैयार हो जाती है।
  • इसकी प्रति एकड़ उपज  20-22  क्विंटल होती है। 
  • खाने के लिये यह अच्छी किस्म है।
  • इस किस्म के दाने माध्यम आकार के होते है साथ ही चमकदार होते है।
  • इस किस्म के पौधों की लम्बाई 95 सेंटीमीटर होती है।

PBW 502

WH 1105

  • इसकी बिजाई नवंबर में की जाती है।
  • इसके पौधे की लम्बाई 95 -100 सेंटीमीटर तक होती है।
  • यह किस्म 130 -135 दिनों में पक कर तैयार हो जाती है।
  • यह पीला रतवा की प्रतिरोधी किस्म है।
  • प्रति एकड़ इसकी पैदावार 20 – 25 क्विंटल होती है।
  • इस किस्म के पौधों का कद छोटा होता है, इसका औसत कद 95-97 सेंटीमीटर होता है।
  • यह 155 -157 दिनों में पक कर तैयार हो जाती है।
  • इस किस्म की एक एकड़ में उपज लगभग 23 क्विंटल तक होती है।

PBW 725

PBW 343

  • यह किस्म 150 -155 दिन में  पक कर तैयार हो जाती है।
  • यह पीला और भूरा रतवा की प्रतिरोधी किस्म है।
  • यह एक एकड़ में 23 क्विंटल तक की पैदावार देने में सक्षम होती है।
  • सिचित क्षेत्रों में इसकी बिजाई करना उपयुक्त होता है।
  • यह 145 -150 दिनों में तैयार होती है।
  • प्रति एकड़ इसकी पैदावार 20 -25 क्विंटल होती है।
  • अक्टूबर – नवम्बर में इसकी बिजाई की जाती है।
  • इसके करनाल बंट और गर्दन तोड़ के प्रतिरोधी किस्म है।

PBW 373

HD 2932

  • यह किस्म लगभग 130 -140 दिनों में तैयार हो जाती है।
  • इस किस्म के पोधो की लम्बाई 90 -100 सेंटीमीटर तक होती है।
  • बिजाई का समय नवंबर के दूसरे हफ्ते से लेकर दिसंबर के तीसरे हफ्ते तक होता है ।
  • इसकी प्रति एकड़ 22 – 24 क्विंटल तक की उपज है। 
  • यह किस्म पिछेती बोई जाती है।
  • यह किस्म 105 -110 दिनों में पक कर तैयार हो जाती है।
  • इसकी प्रति एकड़ 17 – 20 क्विंटल तक की उपज है।
  • यह भारत के किसी भी राज्य में उगाई जा सकती है।

WH 147

WH 711

  • बिजाई का उपयुक्त समय 10-25 नवंबर है।
  • यह किस्म 115 -120 दिनों में तैयार हो जाती है।
  • यह 18-20 क्विंटल तक एक एकड़ में पैदावार होती है।
  • इस किस्म के पौधे का कद 100 -105 सेंटीमीटर होता है।
  • 125 -130 दिनों में यह फसल पक कर तैयार हो जाती है।
  • नवंबर के दूसरे हफ्ते से दिसंबर के आखिरी हफ्ते तक इसकी बिजाई की जाती है।
  • यह 18 -20 क्विंटल तक एक एकड़ में पैदावार होती है।

इस के अतिरिक्त और भी कई किस्मे बाज़ार में मजूद जो अपने – अपने राज्यों के हिसाब से बेहतर है। बाज़ार में कई लोग ऐसे भी है जो मिलावटी बीज बेचते है, इसलिय किसानो को ऐसे लोगो से सावधान रहना चाहिए। दुकानों से बिना बिल के बीज ना ले और अपने नजदीकी एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से सम्पर्क में जरूर रहे ताकि कोई भी नई किस्म बाज़ार में आये तो उसकी जानकरी आपको हो। अगर आप अपने घर का बीज इसतेमाल कर रहे हो तो बिजाई से पहले उसका उपचार जरूर कर ले।

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