Dairy farming business के लिये गाय की कोन सी उत्तम देसी नसल का करे पालन

डेयरी फार्मिंग का बिज़नेस आज के समय में काफी मुनाफा देने वाले बिज़नेस में से एक है यही वजह है की किसानो और नयी पीढ़ी का झुकाव इसकी तरफ ज्यादा है। डेयरी फार्मिंग अगर आप कर रहे है या शुरू करने की सोच रहे है तो इसमें सबसे जरुरी बात है गाय की नसल का चुनाव। वैसे तो भारत में बहुत सी गाय की नसले पायी जाती है लेकिन उनमे से कुछ नसले ही ऐसी ही जिनसे अधिक दूध प्राप्त होता है। डेयरी फार्मिंग के दौरान पशुपालक को गाय की उन्नत नसल की जानकरी होनी चाहिए। गाय की नस्लों की बात करे तो उन्हें तीन श्रेणी में बांटा जाता है जिसमे देसी, संकर और विदेशी आती है। आज हम बात करेंगे देसी श्रेणी में से सबसे उत्तम नस्लों को गाय के बारे में जो अधिक दूध उत्पादन कर डेयरी फार्मिंग के बिज़नेस में ज्यादा मुनाफा देती है।

देसी गाय की उत्तम नस्ले

साहिवाल – यह नसल हरियाणा, उत्तरप्रदेश, पंजाब, दिल्ली, मध्यप्रदेश में पायी जाती है। साहीवाल गाय की नसल एक ब्यात में ग्रामीण सिथितयो में 1400 किलोग्राम तक दूध उत्पादन देती है और व्यावसयिक फार्मिंग की स्थितियों में 2100 किलोग्राम तक प्राप्त कर सकते है।

गीर – यह नसल अधिकतर गुजरात के पहाड़ी इलाकों में पायी जाती है। फार्मिंग की स्थितियों में ये 1500 किलोग्राम तक दूध देती है। भारत के साथ- साथ इसकी मांग विदेशो में भी इसकी मांग काफी ज्यादा होती है। यह नस्ल एक दिन में 50 – 60 किलो दूध देती है।

लाल सिंधी – यह नसल पंजाब, हरियाणा, तमिलनाडु, ओड़िशा और केरल राज्यों में पायी जाती है। यह नसल फार्मिंग की स्थितियों में यह लगभग एक ब्यात में 1800 किलोग्राम तक दूध देती है। भारत में बाकी नस्लों के मुकाबले इसकी शंख्या कम है। यह लाल रंग की होती है इसलिय ये लाल सिंधी के नाम से जानी जाती है।

हरियाणा – यह नस्ल हरियाणा, गुड़गांव और दिल्ली में मुख्यत पायी जाती है। सलाना इससे हम अधिक से अधिक 3500 किलोग्राम तक दूध उत्पादन प्राप्त कर सकते है। 

कृष्णा वैली – यह नसल कर्नाटक में पायी जाती है। एक ब्यात में औसतन 1000 किलोग्राम तक दूध देती है।

कांकरेज – ये देशी नसल गुजरात में पायी जाती है। डेयरी फार्मिंग के लिए ये नसल काफी अच्छी है, इससे हम व्यावसयिक स्थितियों में 3500 किलोग्राम तक दूध तक प्राप्त कर सकते है। यह 36 से 42 महीने में अपने पहले प्रजनन के लिये तैयार हो जाती है। 

थारपारकर – यह नसल राजस्थान में पायी जाती है, दूध उत्पादन की बात करे तो अधिक से अधिक 2500 किलोग्राम तक प्राप्त कर सकते है।

थारपारकर नसल

इन नस्लों के अलावा भी और भी देसी गाय की प्रजातियां है जिनका व्यावसयिक क्षेत्र में इस्तेमाल किया जाता है:

  • मेवाती – पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तरप्रदेश में मुख्यत पायी जाती है।
  • मालवी – मध्यप्रदेश
  • खिलारी – कर्नाटक और महाराष्ट इसका मूल स्थल है
  • खेरीगढ़ – यह उत्तरप्रदेश में पायी जाती है
  • हल्लीकर – कर्नाटक
  • निमरी – मध्यप्रदेश
  • गंगातीरी – बिहार और उत्तरप्रदेश

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