अब लगाये बरसीम की उन्नत किस्में और पाये पशुओ के लिये चारे की उत्तम पैदावार

अब लगाये बरसीम की उन्नत किस्में और पाये पशुओ के लिये चारे की उत्तम पैदावार

रबी के मौसम में बरसीम की फसल चारे के रूप में लगाई जाती है, बरसीम पशुओ के लिए काफी पौष्टिक होती है और उनमे दूध उत्पादन की क्षमता को भी बढ़ाता है। किसान ज्यादातर इसकी खेती अपने पशुओ के चारे की आपूर्ति के लिए करते है तो कुछ किसान इस चारे को बेचने के लिए इसको उगाते है। अन्य फसलों के साथ मिलाकर इसको उगाया जा सकता है।आज हम बात करेंगे बरसीम के उन्नत किस्मो के बारे में और खेती की कुछ जरुरी बाते

बरसीम की खेती

  • सितम्बर के आखरी हफ्ते से अक्टूबर तक इसकी बिजाई कर सकते है।
  • बरसीम की बिजाई शाम के समय करे।
  • बरसीम की खेती मिट्टी को उपजाऊ बनाती है और उसकी गुणवत्ता को और बेहतर बनाता है। 
  • एक एकड़ में 8-10 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है।
  • बिजाई के 40-50 दिनों बाद इसकी पहली कटाई की जा सकती है।

बरसीम की उन्नत किस्मे

बरसीम की बहुत सी उन्नत किस्मे बाज़ारो में मजूद है जो उत्तम पैदावार देती है और उनकी 4 से 5 बार कटाई की जा सकती है। उच्च बरसीम वही होती है है जो काफी समय तक हरी भरी रही है। पशुओ के चारे के लिए बरसीम पूरे भारत में लगाई जाती है तो अपने क्षेत्र और मिट्टी के आधार पर किस्मो का चुनाव करे

वरदान

  • यह सम्पूर्ण उत्तर भारत में लगाई जाती है, चारे के लिए इसकी 4 से 5 बार कटाई की जा सकती है।
  • यह किस्म प्रति एकड़ 30-40 टन तक चारा उत्पादन करती है।
  • यह 160 से 170 दिन की फसल है।

BL-1

  • यह लम्बे समय तक हरा भरी रहती है इसकी कटाई लगभग मई तक होती है।
  • यह किस्म प्रति एकड़ 45-50 टन तक चारा उत्पादन करती है।
  • यह किस्म सर्दी और गर्मी दोनों में अच्छी पैदावार देती है।

Mescavi

  •  यह किस्म भारत में किसी भी क्षेत्र में उगाई जा सकती है।
  •  बिजाई के 50 दिनों बाद इसकी पहली कटाई की जाती है।
  •  इस किस्म की 4 से 5 बार कटाई की जा सकती है।
  •  यह क़िस्म प्रति एकड़ 30-40 टन तक चारा उत्पादन करती है।

BL-10

  • यह किस्म लम्बे समय तक चलती है जून के पहले हफ्ते तक इसके हरा चारे का उपयोग किया जा सकता है।
  • यह तना गलन रोग की प्रतिरोधी किस्म है।
  • यह किस्म 50 टन कुल उत्पादन देती है।
  • बिजाई के 40 से 45 दिन बाद इसकी पहली कटाई की जा सकती है।

BL-42

  • यह बरसीम की अगेती किस्मो में से एक है, इस किस्म में जड़ गलन और तना गलन की बीमारी बहुत कम देखने को मिलती है।
  • बिजाई के लगभग 40 दिन बाद यह पहली कटाई के लिए तैयार हो जाती है।
  • यह किस्म 50-55 टन तक कुल उत्पादन देती है।

BB 3

  • इस किस्म की 4 से 5 बार कटाई की जा सकती है और यह लगभग डेढ़ फिट तक की उचाई के होते है।
  • यह किस्म 50-55 टन तक कुल चारा उत्पादन देती है।

पूसा ज्वाइंट

  • जिन इलाको में ज्यादा सर्दी और पाले पड़ता है, वहा यह किस्म काफी कारगार साबित होती है।
  •  यह किस्म 50-55 टन तक कुल चारा उत्पादन देती है।

JHB 146

  •  यह किस्म उत्तर भारत और मध्य भारत में लगाई जाती है।
  •  इस किस्म में प्रोटीन की मात्रा 25 प्रतिशत तक पाई जाती है।
  •  इसके चारे की 4 से 5 बार कटाई की जा सकती है। हर कटाई में 20 टन उत्पादन प्राप्त होता है।

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